The sun rises with a new day, with new hopes, with shining wealth,
gloomy night is replaced with lights and hopes, joy encloses by stealth.
It has always an end, how dark a day and complex a way,
And I am a verse of a poet,I am a dream statue the formation of clay.
Tuesday, June 11, 2013
उदासी..
चिरागों की भीड़ में घीरा लाचार अँधेरा चुप सा अकेला कंपकपा रहा है, ये डर धीरे धीरे रेंगता हुआ नसों में पिघलता हुआ उतरा ही जा रहा है, वो कहते हैं की आज जश्न है, शाम रौशन है, महताब मेहरबान है, मगर कोई हो जो पूछे सन्नाटों से भी हाल उनका, कितना कुछ कहते थे कभी आज सब के सब बेजुबान हैं..
खूबसूरत .... चमकीला अंधेरा ..... कीप इट अप अँड अप ... :)
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