The sun rises with a new day, with new hopes, with shining wealth,
gloomy night is replaced with lights and hopes, joy encloses by stealth.
It has always an end, how dark a day and complex a way,
And I am a verse of a poet,I am a dream statue the formation of clay.
Tuesday, September 24, 2013
*एक घर*
कब तक तेरे सारे सपने पैरों में हैं उलझे हुए, कब तक तेरी आँखें प्यासी, इन सूखे सपनों की परत लिए।
कब से तेरा आकाश है सूना, इन बरसातों के सैलाब पीये, कब तक इन कच्चे रास्तों पर तू ठोकरें और ख़ाक सहे।
कब तक तू यूँ बेघर हो, घूमेगा सड़कों-सड़कों, कब तक तेरे नंगे सर को एक टूटी छत का इंतज़ार रहे।
बहुत सही ....
ReplyDeleteकैसे करूँ मैं बारिश की दुआएं ...
देखे हैं मैंने भी कच्चे झोंपड़े ... !!