Friday, September 27, 2013

मैं भगत हूँ


मैं भगत हूँ 
कान खोल कर सुनो, 
और आँख पीस कर देख लो
इस आज़ाद भारत में बेड़ियों में जकड़ा 
हुआ, अंग्रेजों के छोड़े गए 
इन हुक्मरान कुत्तों 
द्वरा आज फिर घसीटता हुआ 
ले जाया जा रहा हूँ। 
सुना है आज मेरी फांसी का दिन है।
"इतिहास खुद को दोहराता है"
और मैं लटकने को तैयार भी हूँ,
पर अभी धमाका करना बाकि है।
स्वराज के लिए चीखते
लोगों का एक जुट होना बाकि है।
एम टीवी, वी टीवी
और ज़ूम के माया जाल में सूक्ष्म हो चुके
जॉब, बिज़नस के मुनाफे, करियर
की चिंता से ग्रस्त आई मीन, यू नो के रागों के
बीच कॉम ओन डूड लेट'स पार्टी करने वाले
युवाओं का भारत माता की जय का नारा लगाना बाकि है।
अभी इन्कलाब आना बाकी है।
अभी भगत तो है मरने को
पर जवाब में उमड़ता
हुआ जन सैलाब आना बाकी है।
अभी स्वराज पाना बाकी है।

मेरा क्या मैं तो इतिहास हो चुका
वर्तमान न अब बन पाउँगा,
कहने को हो तुम भविष्य देश के
पर अपनी प्यारी भारत माँ को
किसी वीर भगत ही को सौंप जाऊंगा।

(तुम अमर हो भगत सिंह)

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