Friday, September 18, 2015


मैं तुम्हें सोचता हूँ और सफ़ेद हो जाता हूँ,
जैसे किसी देवदार पे बैठी
सफ़ेद चिड़िया एकटक आकाश ताकती रही
और अब इत्मीनान से एक धवल उड़ान भरती है।
जैसे किसी मादक देह की महक से
दूर तक खिल रही हों वादियां,
या किसी बीचों-बीच पत्थर पर
वे श्वेत वस्त्र पवित्र कर देते हों तमाम झरने।
सुनो मैं दूर निकल आया हूँ, बहुत दूर...
यहाँ इस सफ़ेद झील के किनारे
एक दूधिया वृक्ष के ठीक ऊपर
कुछ उजले तारों के छींटे पड़ें हैं,
वहां उस तरफ झील में एक सफ़ेद नाव पर दो प्रेमी बैठे हैं,
कुछ स्वर फूट रहे हैं, कुछ धुनें बह रही है
वो खिलखिलाहट, वो सफेदी चांदनी में घुल रही है
और चाँद अब सफ़ेद हो रहा है..
मैंने अक्सर महसूस किया है कि यदि
प्रेम में साफगोई हो तो वह सफ़ेद हो जाता है।
और देखो
अब एक सफ़ेद साफ़ हवा मुझे घेरे हुए है
जैसे कोई बेदाग़ सी चादर मुझ पे लपेटे हुए है।
ये मीठी बूंदों की रात रानी मेरी देह पर झर रही है,
मेरे होंठों के सेकों से धौलाधार पिघल रहे हैं।
धीरे-धीरे सभी घाव भर रहे हैं
एक नींद बन आई है।
अनंत निर्वात पर चौंधियाता सफेद भर गया है,
हर तरफ से यहाँ अब धुंध घिर आई है
गाढ़ी सफ़ेद...
आह!
"शांति" अगर कहीं प्रत्यक्ष रूप से देखी गयी होगी
तो वह किसी कोमल सीप में रखा उज्जवल मोती रहा होगा,
जिसे कुछ कहना नहीं होता बस उस गर्भ में रहना होता है।
प्रेमी एक असली बैरागी होता है,
प्रेमिका एक माँ जिसे उसकी प्रगाढ़ता में उसे पढ़ना होता है।
और सुकून.....
यह एक सूखा हुआ पत्ता है
जिसे वृक्ष से झर कर उसके कमलों में रहना है।
यह एक झरा हुआ पंख है
जो आकाश से उतरा है और मेरी हथेली पे ठहरा है।
सुनो मैं दूर निकल आया हूँ, बहुत दूर..
यहाँ हर तरफ प्रार्थनाएं हैं
और शब्दों ने अपने हिस्से का प्रकाश खोज लिया है,
यहाँ दूर तक उजाला फैला हुआ है.
सफ़ेद...
यहाँ एक श्वेत वस्त्रधारी ब्राह्मणी गुलबहार चुन रही है,
और उस देवदार पर वो सफ़ेद चिड़िया आकाश ताक रही है..
सुनो मैंने महसूस किया है कि
सफ़ेद इन्द्रधनुष का एक ज़रूरी रंग होगा।

Friday, September 11, 2015

वाया "फेसबुक"-२

मैं चुपचाप सुन रहा हूँ कुछ भी कहो तो इतना हल्के से कहना कि तुम्हारे कहने की आवाज़ तो आए पर मेरे सुनने में कोई अवरोध न पैदा हो, तुम्हारे शब्दों में कहने का सुकून बचा रहे व मेरे अन्तर में सुनने की शान्ति।
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मेरे लिए सही या गलत की परिभाषा इतनी भर है कि मुझे तमाम "नीतियों" व "वादों" के बावजूद भी प्रेम हुआ करता है, मेरी व्यवस्था इतनी भर है कि मैंने अपनी खिड़की पर कागज़ की एक विंडमिल टांगी हुई है जो कि क्षीण है पर हवा के चलने पर अब तलक घूम रही है और ये कि मेरी पुतलियों में अब भी स्वप्न नाचा करते हैं.. तुम्हें चुनने के प्रति मेरा चुनाव इतना भर है कि "तमाम ग्रेशेड्स के बावजूद भी जीवन में एक हरा और एक लाल भी है जो मूड बदलते रहने पर तुम्हारी आँखों का रंग है.. मेरा डिसिप्लिन केवल इस तथ्य पर आधरित है कि तुम्हें सोचते रहने को पोषित करने हेतु जीवित रहना आवश्यक है और जीवित रहने के लिए तुम्हारा वहां सोच के उस पार अवेलेबल रहना!
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वहां उस दिन अत्यधिक बर्फ़बारी हुई बावजूद उसके मैंने किवाड़ आधे खुले रखे.. और दस्तक होते ही उम्मीद हैवी कार्डिगन, ओवर कोट व स्नो कैप की की गयी जबकि उम्मीद ने एक फटी कमीज और बिखरे बालों में दस्तक दी। 
"क्योंकि जीवन अक्सर कहा गया है कि एक अनुशासनहीन बच्चे की तरह है जिसके लक्षण अव्यवस्थित व बेतरतीब हैं खैर उस बच्चे को अब सीख तो नहीं दी जा सकती लेकिन सचेत रहते हुए उसकी किर्याओं को ग्रहण कर लेना एक पीस ऑफ़ आर्ट्स को बिना समीक्षा/ आलोचना के अपना लेना है"

इसलिए फिर एक दूसरे दिन यूँ ही जब सड़क पे चलते-चलते मुझे १०, १० के चार नोट पड़े मिले उस दिन के बाद से फिर मैंने अपनी माँ की बात मान नीचे देख के चलना शुरू कर दिया। हालाँकि वही घटना एक तीसरे दिन फिर से घटी पर इस बार मेरी चेतना में नीचे झुक के चलना तो था लेकिन नोट का मिलना नहीं था...
.... आप कह सकते हैं कि जीवन न केवल रैंडम है बल्कि एब्सट्रैक्ट भी कमतर नहीं।
यूँ तो मैंने अपनी प्ले लिस्ट को हमेशा ही "रैंडम्ली सिलेक्टेड" मॉड पर रखा, फिर भी क्षण-क्षण में अपने सबसे पसंदीदा गीत को सुनने की इच्छा पाली। और जीवन ने भी हर दफा मेरी इच्छा के विपरीत गीत बजाने शुरू किये। मेरे सबसे दुखी दिनों में उस लम्बी प्ले लिस्ट में से कोई सैड सांग नहीं बजा बल्कि थिरकने वाले हलके फुल्के गीत प्ले हुए..
… जीवन के प्रति आपके तमाम आरोपों मसलन जटिलता, अवसाद, अघुलनशीलता व संकरता के बावजूद कुसामयिक दिनों में यह स्ट्रेस बस्टर भी हो सकता है।

कोई हैरत नहीं होनी चाहिए परन्तु होती है जबकि हम हर वक़्त चेतना पे ज़ोर दिए रहते हैं दुनिया की सबसे विचित्र चीज़ें अवचेतन की अवस्था में घटती हैं। दरअसल हम चमत्कारों को घटते हुए देखने के इच्छुक हैं। हम लिखने से पहले ही चाहते हैं कुछ ऐसा लिख देना जो कालजयी हो। हम हावी रहना चाहते हैं इसलिए जादू देखते हुए भर्मित होने को भी पूरा जीने से अधिक उस क्रिया को सीख कर भर्मित कर देना चाहते हैं।
जबकि जीवन एक सरल "घटना" है इतनी सामान्य कि वह रैंडम, एब्सट्रैक्ट और चिंता का विषय भी केवल इसलिए है क्योंकि पूरी तरह हावी होने के लिए हमारा संदर्श उसके प्रति ठीक वैसा है...!


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आदमी परतों में जीता है जीता चला जाता है, आदमी दूसरे को सिरे तक समझता है ऐसा कहता है..!
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मूर्तियां जब खंडित होती हैं उन्हें मंदिरों से हटा दिया जाता है, इंसान जब खंडित होते हैं कविता में जगह बनाते हैं...
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कभी तटों पे हो तो हवा को महसूस करना, उसमे स्वीकारोक्ति होती है.. लहरों का मन पढ़ सको तो देखना स्थिर मन में भी उथलपुथल तो होती ही है.. प्रेम कभी मत करना यह प्रयोजन नहीं है.. कभी बारिश के पहले बादलों को देखना तो जानना कहना बरसने से कमतर नहीं...!

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मैं ताउम्र सामान्य तरह से एक असामान्य जीवन की कल्पना करता रहा किंतु मेरे प्रति जीवन का कोण असामान्य व दृश्य अतिसामान्य प्रस्तुत हुए। मैं जिस भी वस्तु से जुड़ा उसमें सदा साम्य ढूंढता रहा किंतु उस जुड़ाव का निष्कर्ष पूरक निकला।

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“कहाँ किस घाटी के किस शिर पर वो मंदिर है जहाँ की घंटी की गूंज में साँसे आराम पाती हैं..”

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केवल एक बच्चा ही कवि हो सकता है.. दुनिया के साथ जो चल रहे हैं वो बड़े हो रहे हैं.. बच्चों की अपनी दुनिया है.. उस दुनिया के रंग विशिष्ट हैं..

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वह ज़िद करती, ज़िन्दगी जीने की पुर ख़्वाहिश में सिगरेट की जड़ों से साँसें चुरा लेती और धुँए में अपने बोलों के शहद उतार देती। 
उसकी आवाज़ की खरांश में लर्ज़िशों की मौजें उठती, वह लहरों की आगोश में घुल गयी नदी हो जैसे, वह बड़े से चाँद के ठीक नीचे उतने ही व्यास में सुरों की लड़ियों में पिरोई हुई एक सीप। 
वह गीली रेतों में नंगे पैर चलती और अकसर कभी जब समंदर में उतरती तो मन में एक टीस उठती, वह दूर क्षितिज पर उड़ता हुआ पंछी, अभी सुथरी, अभी धुंधली, और अब ओझल... 
......वह एक छोटा सा लम्हा और लम्बी सिसकी।

खैर वाकिफ था कभी होना और यूँ भी वह हवा की झूम से झरा एक पंख,
.....मेरी यादों के सात रंग.. !


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दुनिया की तमाम लड़कियां लाल रंग में अच्छी लगती हैं, "लाल" स्मृतियों में ठहर जाने वाला सबसे गहरा रंग है.. !"

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आग अत्यंत आवश्यक होती है, भीतर की आग को रिस्टोर रखना उचित है, बात बात पे सुलग जाने वाले कहीं बीच में ही ठंडे पड़ जाते हैं.

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किसी अपनी दिशा को परिंदे उड़ते हैं.. समंदर से हो सिर्फ शहर नहीं होते, उफ़क़ भी होता है औ तहरीरें होती हैं, नमी सिर्फ मौसमों में नहीं होती, लफ़्ज़ों की पैठ से भी भंवर उठते हैं, फिसलन सिर्फ रेतों भर ही नहीं है, ज़हन भरे हों तो ज़बानें भी सरकती हैं..

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एक अंतिम गिरह खुलने तक जीवन जिज्ञासा की पीक पर छोड़ दिए गए कई अधूरे दृश्यों का एक प्लैन्ड क्लस्टर है... !

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इंतज़ार में बने रहना कितना सुखद है कि हम अब तक सफर में बने हुए हैं... किसी हसरत में बंधे हुए उसके मुकम्मल होने की कल्पना करनी है, किसी स्वप्न के बुलबुले में उतर कर हल्के से ओस पे जा बैठना है और किसी जाते हुए के हिलते हाथों को दूर तक देखते रहना कि उम्मीद बाकी है अभी उसे गुज़र कर फिर हम ही तक पहुंचना है... असल सुकून तो राह पर ही है, मंज़िल तो सिर्फ चल सकने भर का हौंसला है...
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दिनों की दौड़ती धड़कनों व रातों की मौज उठती सांसों के मध्य कहीं एक दिल हो नींद सा, हूकों व कराहों के बीच कहीं एक जगह बचे आह भर। चाहे न हो कोई बत्ती चौक में, यातायात तूफान भरे, एक ख्वाब भर उड़ान हो एक हवा चले सुकून भर।

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मुझे तुमसे कभी कुछ नहीं कहना होता, ज़रूरी या अर्जेंट जैसा तो कभी कुछ नहीं बस तुम्हारी आवाज़ सुन सकने और खो जाने के मध्य कुछ नहीं कह सकने की स्थिति में कुछ बना कर कह देने भर ज़रूरी हैं कुछ बीती बातें 
...वरना तुम्हें देखना, तुम्हारी खनक सुनना वैली ऑफ़ फ्लावर्स की रंग बदलती संगीतमय घाटिओं के मध्य घिरा होना है .........उनींदा आँखों को जब पीसो तब आश्चर्य।

.....सुनो ये घाटी रोज़ अपने रंग बदलती है तुम ख्याल करना।


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क्षितिज पर का आधा सूर्य हो तुम। और मैं, मैं एक उदास धुन....

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एक गुज़रा हुआ दिन अटक के यूँ पड़ा हुआ ज्यूँ चाँद चेहरे के गले सुरीला रेशमी रेशा औ जां सुर्ख सूरज टंगा हुआ मोती के जैसा!

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मैं यात्रायें करता हूँ, उस प्रकिया से गुज़रना बेहद सुखद है भले ही फिर वह जगह कुछ दिनों में कचोटने लगे... यह ज़रूरी है, अवशेष रह जाएँ, जगहें बदलती रहें, यात्राएं बनी रहें !

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हर घर की कुछ ना कुछ जरूरत होती है, कभी महज़ एक घर की जरूरत होती है!

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मैं जब यहाँ से चला अपना बीता यहीं छोड़ गया.. कारण साथ रहे ये कभी ज़रूरी नहीं था पर जो साथ रखी वो यंत्रणाएँ थी.. स्वीकारूं, मैं कष्टों से उत्पन्न सुखों को खुद से अलहदा नहीं रख पाया। 
मैं लोगों से जुड़ा उनकी तमाम कमज़ोरियों की वजह और उनसे अलग न हो पाना मेरी उतने से अधिक कमज़ोरियाँ..


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Thought continues..


"Let's not talk about pain or suffering or create the one is never felt ever..!"
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"Every space between the words is the most needed distance, every silence is the most melodic sound, every departure is the most possible arrival, every separation is the most hopeful spring..!"
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"Does anybody else love you like I?
Who keeps the cage open If not I!"


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"We chase for good to happen to us, the problem is we chase happening !"

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"And this goes in progression, my birds tell me the morning and the wine tells me the night."

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"What kills is not cigarette, not wine not even love, what kills is that horrible thought of being killed.. What kills is got a life but not lived."

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"It's good to remain a kid..no one questions your sensitivity."

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"It is always a bliss when you don't know where you're heading to.. You can walk through and through.. The night I could have walked to the uncertainty but then I realized I have got a house a mile away and I had to turn back."

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"Falling in love is like making an art, you can't come over both!"

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"I have kept a letter in that empty envelope, words' got the feelings and it's got the soul..."

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A traveler must forget the roads !

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"In this empty house during the night hours a voice breaks the silence "somebody must be hiding behind the darkness, somebody must be lost within, somebody must be in a pursuit of his existence, somebody must be missed." 
Alas! 

These familiar barking of the unknown creatures.."

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you are in feeling all the time !

haha..yes I do..I told you,
I am wholeheartedly in feeling and I have got no sense of reality..

But you should..At least a part of you should..

with all the submissiveness and humbleness
I am an artist close to a great one and a lover affordable..I am a hippie and a human..I am a man with mustache..I can feel songs and the voices..I sway with trees in winds..I am a drop right from the clouds and I am one of a guitar strings..
..I am within the tumults of emotions...and for this sake I should have all the rights to leave this worldliness and get myself a shell..shell of feelings...!

If you are ready to leave the world only then
I can't find any flaw in your ideology...!

I am a non social being
living triumphantly in this suffocated hypocrite world..

hahaha..oh ho..have to bear with it anyhow..

haha..I am obsessed I told you..so don’t bear but live,
you too just live it and you are gonna love it..!!
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Wednesday, June 17, 2015

"एक रात के तवे पर चाँद पकाते हुए"

मुझे मत पढ़ाओ कविता,
संवेदनाओं से क्षीण बाँझ ज़मीन पर शब्दों की बुआई छोड़ दो।
छोड़ दो ज़िद
कि पिंजरे में छटपटाते पंछी को निहारते रहो देर तक, 
कि आज़ादी दिवस पर कम-अज़-कम
"एक उम्मीद का पौंधा" रोप सको।
देर तक आकाश ताकना छोड़ो,
कि समझने लगो बादलों की बनावट को खुला खेत
कि कबूतरों की नाक में ज्यौड़ा डाल के जुता सको।
रतजगे न करो,
कि उदास गुलाब के मुरझाने पर
बीत गए को याद करो।
लोगों से इतना मत भागो के अकेले हो जाओ
कि सिगरेटों को चूस कर धुएँ के गरारे करो
और खांस-खांस के भीतर का खालीपन भर सको।
ठहरो!
उस शहर में ना बसो,
जहाँ न कोई ठोर हो,
लैंप-पोस्टों से वेदना बरसे व समय पे "छाता" भारी हो।
और सुनो मुझे मत पढ़ाओ कविता,
कुछ हाथ का काम करो-
"हो सके तो ठण्ड से ठिठुरी दुर्गा की पीठ मलो,
शम्भू महतो के हिस्से का रिक्शा खींचो,
या फिर विलिंगटन वुड्स की दवात में ओक से स्याही भरो।"
और न हो सके कुछ भी अगर
तो अपनी उड़ान पर नज़र रखो,
जब परों को चस्पा कर छतों से कूदो
इतना ख़्याल करो कि यह
किसी विफल किसान की आत्महत्या का काव्यात्मक प्रयास न हो !

Thursday, January 15, 2015


बेअदब थे ख़्याल औ तसव्वुर में स्याह ख़ुमार थे
चिलमनों के पीछे के सुर्ख लबों पे लाल थे।

पेशानी से जो हटी तो नज़रों पे जा टिकी
गर्दन पे लहरी लट हर अदा से दागदार थे।

वो हर घडी कहते रहे हर्फों के कलंदर 
हम कभी नज़्म, शेर, कभी अफ़साना-ए-यार थे।

उनकी कैफियत में और क्या लफ्ज़ ज़ाया करें
वे थिरकती बहुत थीं, हम लचक की मार थे।

अब कहानी यूँ चेहरे रंग चढ़े सुनहैरी पानी के
जिन्हें हम बाब समझे ख़ुमारी में वे कसीदे ख़ाक़ थे।

गज़ब की मयकशी थी उनकी अंदाज़-ए-गायकी में
वो जब हँस के साज़ उठाते हम छलकाते जाम थे।

उन्हें अजूबा-ए-जीस्त,करिशमा-ए-ख़ुदा करार दिया
इस तरह "टिल्ट" हुए के फिर उम्र भर के गुलाम थे।

नाम के अव्वल लगाके "दा" उन्हें अलहदा बना दिया
और हम उनके मैनी औ फ्यू औ दे में कहीं यू भर के इंतज़ार थे।

Wednesday, January 14, 2015

"ए सिनॉप्सिस"

कहानी ज़र्द पन्नों में दर्ज़ प्राण, आभ्यंतर विकसित अपेक्षाएं व उम्मीद आधार। 
इतनी जिवंत कि उस अंतराल में उससे इतर यथार्थ कुछ नहीं... 
मृदु अतः मूढ़ नक्काश। 
आकृति- किरदार परदराज़ अंतिम आकाश में अभी तक धुँधली अब अदृश्य। 
भाव ढाँचे से निकलकर अपने मौलिक आवरण में स्थापित व शब्द गल कर पुनः कच्छ। 
अधघटे किस्सों के ढेर में गर्द में लिपटे संवाद।
......स्मृति पटल पर मंचित यह एक उदासीन रंगमंच।

Tuesday, January 6, 2015



you were an unknown thought before I wrote you in a poem
you were mere a structure before I filled you with a soul....
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you need to be silent if you are in love..
your love is the ultimate truth.
This earth always revolves irrespective of the fact
that it's kindling when the sun is close..!
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I have seen people who are really intellegent
and I have seen people trying hard at the extent of foolishness !
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"hmm" is a composition without the lyrics.
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passion atleast once should turn into obsession.
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Barricade the creative minds by offering them a job...!
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We all were blessed with reminiscence
so that we may offer flowers to someone very special
on the last of december...!!
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In context to a Poem
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"I used to adopt new born hopes,
just to feed and let them die,
because smoking is either killing or fun..
There is nothing to be called "injurious" !
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I belong to unproven truths and undiscovered realities..!!
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Silence is a shadow of words.
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ignorance is but the silent acceptance.
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It’s been a long since someone has appeared with such deep eyes..
Imagine how beautiful would be the november this time..!!
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For me there are two universes, one is you and other is the real one.
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language is the root of contention !!
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Poetry is an art of saying and hollowing..!!
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Soul that stays in peace can uphold all it's dream for long.
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Staying in search of poetry is to stay alive ...!!
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All my sorrows would be an exaggeration !!
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Those who are not broken remain incomplete..!!
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"And an Artist is a pure work of Feelings."
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"I am wholeheartedly in feeling, I have no sense of reality..."
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The beauty of arts is everybody can feel and everybody can create.....
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"Ghost is but an illusion because nothing is as scary as you all"
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Either get charged from the soul or live soul free!!
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I have never seen my soul but I think "feel" that resembles It..
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There is something magical about hills, they will call you back.
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I once opted to write and then I realised
I was left with nothing
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